बारिशों वाली शाम में चाय का प्याला लेकर आना तुम .....मैं झूठमूठ को रूठी रहूंगी आके बगल में बैठ जाना तुम।....
फिर मिलके देखेंगे बादलों और बूंदों की लड़ाई में कैसे तारों की शामत आती है !
कैसे पहाड़ों की आढ में आते है बादल ,बूंदों को खादेडते है . कैसे बिजली एक दम से आती हैं मानो गुस्से में कहती हो की चुप अब झगडा बंद करो दोनों !
अपने पेरो पे गिर पड़ेंगी देखना कुछ बूँदें ,टूट जायेंगी बिखर के।..बस उसी वक़्त मन लेना तुम मुझे ,मैं झूठ मूठ रूठी रहती हु ,टूट के बिखर जाउंगी!

Never new you miss the evening tea so much!!! i miss it too.
ReplyDeleteWell jokes apart, very well written PooGee!!
Only 2 words:
ReplyDeleteSimply sweet